जय जवान
रण क्षेत्र अगर ये ज़िस्म बने
मैं रक्षक इसका वस्त्र बनूँ
मैं ढाल बनूँ मैं अस्त्र बनूँ
मैं महादेव का शस्त्र बनूँ
दुश्मन के ऊपर ग़ज़्र बनूं
फौलाद बनूँ मैं वज़्र बनूँ
मैं करूँ अरिदल का महाविनाश
जीवन को तड़पे उसकी हर एक सांस
वो महाप्रलय की बेला हो
मेरा अरिवक्ष पर खेला हो
मैं रक्त से होली खेलूँगा
हर वार को हंस कर झेलूंगा
उसकी मौत भी अब चिल्लाएगी
पर मौत न उसको आएगी
वो सोच के ही थर्राएगा
जब जब विचार ये आएगा
गर आंख दिखाना चाहेगा
वो महा विनाश बुलायेगा
जब मांगेगा वो दया भीख
वह जाएगा एक बात सीख
यदि मानचित्र पर दिखना है
भारत से दूर ही टिकना है
-/-आशीष कुमार रंजन
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